Yaado Ka Baksha

यादों का बक्सा

hvijadmin Uncategorized 4 Comments

वो बेसमेंट में रखा बक्साजिस में तुमको कैद कर रखा थाआज उसे निकाला है तुम्हारी वो आधी सुलगी सिगरेटहोठों से लगा कर इक कश भरती हूँबीते दिनों का धुआँ छा जाता है तुम्हारी वो अधूरी सी इक नज़्मउलट पलट कर बार बार पढ़ती हूँवस्ल की वो शब का ख़्याल आ जाता है तुम्हारी वो टूटी घड़ी का इक सटरेपआँखें आज भी नम हो जाती हैंटकरार की वो आख़िरी रात याद …